After a long break I am writing some lines because all these days I was busy fighting with IT life and some cruel managers. At times I felt leaving this IT world and move back to Indore to live a happy life but then I thought of my dreams and visions and it gave me strength to stand-up and fight.

I am living corporate life since last 6-7 months and have gained some bitter experiences out of it. Back bitching and dirty politics are the only things that are scattered everywhere. 
Here is a small composition of my experience..... 

बड़ा भोला बड़ा सदा बड़ा अच्छा था 
मेरा घर तो तेरी ऊँची ऊँची  इमारतों से अच्छा था 

पहेले मैं  दोस्तों में जाना जाता था  ...

यहाँ   IDCARD और   CUBICLE NO. से पहेचाना  जाता हूँ 

मेरे पिताजी की गालियाँ  मीठी  थी ..

 MANAGER  की छोटी से डाट दिल को चुभती है 

2  दोस्तों का साथ और  धुप में खेलना अच्छा लगता था 

यहाँ comfortable rolling chair  और  AC में भी   दम  घुटता है 

 वहां दादी की कहानियाँ और दोस्तों की  गालियाँ थी 

यहाँ   लम्बे लम्बे  code  है  और client  की गालियाँ है 

यारों  के  बड़े बड़े राज़ दिल में छुपा लेते थे 

 यहाँ छोटी  सी  बात भी सब में फ़ैल  जाती है 

वहां माँ के हाथो की  रोटियाँ  थी 

यहाँ खाने का कोई  ठिकाना  नहीं है 

फिर से जाना चाहता  हूँ 

2 वक्त का चैन  और सुकून से चाहता   हूँ 
माँ  मैं  तेरे पास आना चाहता  हूँ .....