"मै  "
एक छोटी सी कश्ती हू 
मुझे समंदर में पैर रखने तो दो,,
बीच भवर में फस गयी तो क्या 
मुझे अपना आत्मविश्वास जगाने तो दो //

"मै "
एक हिमालय से बहता झरना हू 
मुझे झर झर बहने तो दो ,,
रास्तो में पतझड़ आए भी तो क्या 
मुझे पतझड़ो में रस्ते खोजने तो दो //

"मै "
एक आसमान में उडती चिड़िया हू 
मुझे अपने पंख फेलाने तो दो ,,
अगर चोट लग गयी भी तो क्या 
मुझे एक उचाई तक पोहोचने तो दो //

"मै "
एक बगिया का फूल हू 
मेरी कलियों को ठीक से खिलने तो दो ,,
बिच मौसम बदल भी गया तो क्या 
मुझे अपनी खुशबू बिखेरने तो दो //

"मै "
प्रकृति से बनी एक लड़की हू 
मुझे अपना हूनर दिखने तो दो ,,
बिच ज़िन्दगी थम गयी भी तो क्या 
इस दुनिया में अपना नाम बनाने तो दो //


~नूपुर ~