एक रोज़ यूँही चलते चलते उस पगली ने पूछा मुझ से,
कौन हो तुम और कौन हूँ मैं

मैं मुस्कुराया और कहा
मुसाफिर हूँ मैं और मंजिल हो तुम 
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